यदि आप एक क्रियायोगी साधक है तो तुरंत भूमध्य क्षेत्र को
याद करे , श्वास दर्शन करे , सिर से लेकर पाँव
तक में एकाग्र होकर फिर से दुबारा से देखने का अभ्यास करे . आप सच जानकर हैरान रह
जायेंगे की आप आखिर क्या देख रहे है. आप के भीतर से आपको इस अपराध को देखकर क्या निर्णय लेना है
उसका सच्चा जवाब आने लगेगा . क्यों की जब तक आप क्रियायोग ध्यान का गहरा अभ्यास
नहीं करेंगे आप को इस अपराध के पीछे छिपे सच का पता नहीं चल सकेगा . क्यों अभी आप
मन की आँखों से यह अपराध वाला दृश्य देख रहे है और जाग्रत होने पर आप परमात्मा की
आँखों से यह दृश्य देखेंगे .
क्रियायोग ध्यान के अभ्यास से आप को अनुभव होगा की मन का
अस्तित्व होता ही नहीं है फिर जो दृश्य आप देख रहे है वह भी झूठा है .
पर यदि आप की अंतरात्मा कह रही है की यह वास्तव
में अपराध ही है अर्थात एक अप्राकृतिक घटना है तो फिर खुद परमात्मा आप के शरीर और
मन के माध्यम से वह निर्णय लेंगे जिसके लेने से यह अपराध ख़ुशी में बदल जायेगा और
आप को सच्चा न्याय मिल जायेगा . अर्थात जब तक आप खुद गलती नहीं करेंगे आप के साथ
कभी भी अन्याय नहीं होगा . यह असंभव है .
इसलिए यदि आप को ऐसे दृश्य विचलित कर रहे है तो आप परमात्मा पर विश्वास करके क्रियायोग ध्यान का
पूर्ण मनोयोग से निरंतर गहरा अभ्यास करे और इन
लेखो को ज्यादा से ज्यादा साझा करे ताकि आप जैसे हमारे सभी मित्रों को सभी प्रकार
के कष्टों से हमेशा हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके और हम सभी हर पल खुश रहने लग जाए
. धन्यवाद जी . मंगल हो जी.
