जब आप क्रियायोग ध्यान का पूर्ण मनोयोग से निरंतर अभ्यास
करते है तो आप को आप का भविष्य साफ़ साफ़ नज़र आने लगता है .
आप निम्न प्रयोग करके अपना भविष्य अभी जान
सकते है :
आप शांत स्थान पर बैठ जाए . अब आप अपनी आँखे इतनी बंद करे
की आप को असहजता महसूस ना हो . अब आप के मन का ध्यान अपनी नाक के आगे वाले भाग पर
लेकर आये . अपने श्वास को महसूस करे .
ना तो श्वास को जोर से लेने की कोशिस करे और ना ही श्वास को
धीरे करने का प्रयास करे . क्यों की आप को कुछ भी प्रयास नहीं करना है .
अब आप को धीरे धीरे अनुभव होगा की आप की श्वास अपने आप ही
नाभि तक चलने लग गयी है . और इसके बाद आप को अनुभव होगा की श्वास शरीर के हर अंग
तक जा रही है . इस अभ्यास के दौरान आप को कई प्रकार के परिवर्तन महसूस होने लगेंगे
.
आप को शरीर में कई जगह दर्द , कई
पुरानी बाते याद आने लगेगी , भीतर से आप
के मन में चल रहे प्रश्नों के उत्तर आने लगेंगे .
आप को आप ने कल का दिन
कैसे बिताया था साफ़ साफ़ दिखने लगेगा . और अब आगे आप के साथ क्या क्या होने
वाला है वह भी साफ़ साफ़ दिखने लगेगा . और यदि आप को भविष्य में कोई खतरा दिखाई दे
रहा है तो उसके साथ ही उसका समाधान भी दिखने लगेगा .
पूरा ज्योतिष विज्ञानं प्रकट होने लगेगा .
आप को अनुभव होने लगेगा की सभी गृह आप की किस प्रकार से मदद
कर रहे है .
क्रियायोग ध्यान से पहले जो आप सोच रहे थे की जैसे राहु , केतु और शनि मुझे
परेशान कर रहे है अब आप को यह सच अनुभव होने लगेगा की राहु , केतु और शनि
परेशान नहीं बल्कि मेरी तो हर पल मदद कर रहे है .
आप को भविष्य में क्या क्या सुख सुविधाएं मिलेगी और आप अपने
जीवन में कितनी उन्नति प्राप्त करेंगे यह सब आप को साफ़ साफ़ दिखने लगेगा .
जब आप शांति से बैठकर श्वास से जुड़ते है और
कुछ समय बाद बैठा नहीं जाता है तो आप अपने शरीर को उस स्थिति में लेकर जाए जिससे
आप सिर से लेकर पाँव तक में एकाग्र हो सके और याद रहे आप को अभ्यास के दौरान नींद
नहीं आनी चाहिए . यदि अभ्यास के दौरान नींद आने लगे तो तुरंत अपनी स्थिति बदल दे .
क्यों की कई बार आप खड़े होकर भी यह अभ्यास कर सकते है और अभ्यास करते करते हो सकता
है आप के शरीर की स्थिति ऐसी हो जाये की यदि आप को नींद आने लगे तो आप गिर भी सकते
है . इसलिए क्रियायोग का अभ्यास बहुत ही सतर्क होकर करना होता है . शुरू शुरू में
इस अभ्यास को करने में आप को परेशानी आयेगी . पर जैसे जैसे आप के मन में इस अभ्यास
की आदत विकसित होने लगेगी तो सुरक्षा की शक्ति के कारण अगले दिन यही आदत आपको
क्रियायोग का अभ्यास करने के लिए मजबूर कर देगी . अर्थात यदि आप ने एक बार सही मार्ग
पकड़ लिया तो फिर आप को कोई भी पुराना कर्म भटका नहीं सकेगा . क्यों की हमारे मन की
एक सबसे खास बात यह है की जिस चीज में सबसे ज्यादा मजा आता है हमारा मन सबसे पहले
वही जाता है . इसलिए यदि आप ने क्रियायोग ध्यान के अभ्यास के दौरान अनुभव होने
वाले आनंद का स्वाद चख लिया है तो फिर दूसरे झूठे आनंद आप के मन को लुभा नहीं
पायेंगे. इस प्रकार से आप अपना भविष्य आसानी से जान सकते है . धन्यवाद जी .
मंगल हो जी .
