Swaroop Darshan

बार बार पढ़ने का अभ्यास करे तरंगे बदलने लगेगी

मेरे प्रभु आज माया और ब्रह्म को गहराई से समझा रहे है

मै निराकार और साकार दोनों हूँ . मै ही संघनित होकर साकार रचना (माया) का निर्माण कर रहा हूँ . और मै ही लोगों में यह संदेह पैदा करता हूँ की मै अलग हूँ और आप अलग है . तभी तो मै मेरी लीला का आनंद ले पाता हूँ . यदि मै मेरे बच्चे को […]

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क्या आपका गाँव भी जन्नत बन सकता है ?

आज मेरे भक्त प्रेमियों हमारे प्रभु हमारे को वह राज समझा रहे है जिस को हम अभ्यास में उतारकर जिस गाँव में हम रहते है उसे जन्नत बना सकते है . हम पूरी दुनियाँ घूमते है ओर अंत में अपने पैतृक गाँव में ही आ जाते है . हम दूसरी जगहों की तारीफ करते नहीं

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क्या भगवान कृष्ण ने माखन खाया था ?

मेरे प्रिये मित्रों आज परमात्मा की कृपा से आप का यह मित्र आप के भीतर दिन रात चलने वाला यह प्रश्न की क्या भगवान कृष्ण ने माखन खाया था ?. क्यों की आज पूरी दुनिया में ज्यादातर मेरे मित्रों का मानना है की गाय का माखन , घी , दूध , दही , पनीर ,

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हमें अपमान की अनुभूति क्यों होती है ?

हमारे परमात्मा आज इसे बहुत ही सरल तरीकों से हमे समझा रहे है की आखिर हमे अपमान महसूस क्यों होता है . जैसे हम दो मित्र कही रिश्तेदारी या किसी अन्य जगह जाते है या किसी मंच पर सभी विभागों के मंत्री विराजमान है और प्रधानमन्त्री कुछ विशेष मंत्रियो का ही नाम अपने भाषण में

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किसी भी भाषा का आविष्कार कैसे होता है ?

भाषा का निर्माण भी हमारा मन ही करता है . जैसे एक नवजात शिशु जन्म के साथ एक भाषा कोड लेकर पैदा होता है जो मेडुला में डीएनए के रूप में जमा रहता है . अब यह निराकार शक्ति तय करती है की इस शिशु को जीवन के रंग मंच पर क्या रोल अदा करना

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लोगों से जितना बचोगे उतना ज्यादा फसोगे

आज हमारे प्रभु उस दिव्य ज्ञान को प्रकट कर रहे है जिसे यदि आप प्रभु की कृपा से भीतर तक पूरी समझदारी के साथ उतार लोगे तो फिर आप को लोगों से शिकायत नहीं रहेगी . सबसे पहले तो हमे खुद को नश्वर शरीर समझने की गलती को नहीं दोहराने का संकल्प लेना है .

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कोई आप को गाली दे और आप इसे अवचेतन मन में  ‘इसका कल्याण हो’ के रूप कैसे भेजे ?

इस पुरे ब्रह्माण्ड में एक नाद ऐसा निरंतर गूंज रहा है जो इस आप के शरीर रुपी तंत्र में प्रवेश करता है तो वह आप के मन के सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के अनुसार विभिन्न प्रकार की आवाजों के रूप में इस शरीर तंत्र से बाहर निकलता है . तभी तो यदि आप केवल हिंदी भाषा जानते

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हमारे मन में विचार कहाँ से आते है ?

 यह पूरा संसार परमात्मा के विचार का साकार रूप है  इस प्रश्न में ही इसका उत्तर छिपा है . ‘हमारा मन‘ शब्द की अनुभूति करना ही हमारे विचार का वास्तविक कारण है . विचार का मुख्य स्त्रोत अहंकार है . निराकार शक्ति जब अपने ज्ञान को खुद के वास्तविक स्वरुप के अलावा दूसरे रूप में

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मन का यह गणित समझे आलस्य रचनात्मकता में बदल जायेगा

आलस्य भी एक प्रकार की शक्ति ही होती है पर हमारे अज्ञान के कारण हम इसे स्वीकार नहीं कर पाते है . जैसे पत्थर में भी प्राण होते है पर क्षुब्ध रूप में होते है ठीक इसी प्रकार से हमारा मन भी किसी विशेष प्रकार के भोजन या अन्य पेय पदार्थ के सेवन करने से

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यह प्रयोग अभी करे और पाये हर प्रकार के डर से तुरंत मुक्ति

आप अभी जहा कही भी हो , चाहे बैठे हो या खड़े हो या लेटे हो या खाना खा रहे हो या सफर में चल रहे हो या स्नान कर रहे हो या और कुछ कर रहे हो आप सबसे पहले यह पता करे की आप के शरीर में सिर से लेकर पाँव तक में

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