Swaroop Darshan

नशे की लत से मुक्ति

आज मेरे प्रिय मित्रों स्वरुप दर्शन के इस लेख में ‘नशे की लत से मुक्ति’ का वास्तविक उपाय समझाया जा रहा है .

अभी आप के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे है जैसे :

  • जब सबकुछ परमात्मा कर रहे है तो फिर नशा भी वे ही करा रहे है ?
  • आप के लेख में लिखा है की हम परमात्मा के हाथों की कठपुतली है. फिर नशा ….?
  • सबकुछ पहले से तय है ?
  • मेरे कर्म ही ऐसे है ?

जब आप स्वरुप दर्शन का अभ्यास करते है तो फिर आप को यह पता चलता है की व्यक्ति नशा क्यों करता है ?
हमारा पूरा जीवन चक्र परमात्मा की योजना के तहत ही चलता है और हम हमारी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते है .
अभी हम माया के प्रभाव के कारण परमात्मा से विमुख है . परन्तु अब आप को परमात्मा इस लेख के माध्यम से जगा रहे है की उठो मेरे बच्चे इस स्वप्न से .
अर्थात हम स्वप्न देख रहे है पर यह स्वप्न माया के प्रभाव के कारण सच प्रतीत होता है .
और मेरा यह लेख केवल वे आत्माये ही है पढ़ और समझ पायेगी जिन्हे प्रभु नशे की लत से मुक्त करना चाहते है .
क्यों की अब इन आत्माओं का समय आ गया है नशे की लत से मुक्ति प्राप्त करने का .
इसलिए अब आप को प्रभु से एक होकर इस लेख को बहुत ही ध्यान से पढ़ना है . इसी को ब्रह्माण्ड के साथ एक होना कहते है . इसी को प्रभु के साथ बहना कहते है .

व्यक्ति नशा क्यों करता है ?
क्यों की जब व्यक्ति मन के इस जंजाल में फस जाता है और उसे बाहर या भीतर कही से भी कोई मदद नहीं मिलती है तो उसकी आत्मा छटपटाने लगती है .

  • उसे नींद नहीं आती है
  • उसे डर लगने लगता है
  • वह लोगों से मिलने से घबराता है
  • कोई उसका सम्मान नहीं करता है
  • वह खुद को एक बोझ समझ लेता है
  • उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है

ऐसे बहुत से परिवर्तन उसके साथ होने लगते है
उसकी इस स्थिति को माता पिता भी नहीं समझ पाते है क्यों की अभी वे खुद को ही ठीक से नहीं जानते है तो फिर अपने बच्चे को कैसे समझेंगे की उसके भीतर क्या चल रहा है ?
और कई बार पता भी होता है पर माता पिता अपने संचित कर्मो के कारण चाहकर भी उसकी मदद नहीं कर पाते है .

इसलिए अब उपाय पर बात करते है .
यदि आप खुद नशे से मुक्ति चाहते है तो पहले अपने आप से निम्न प्रश्न पूछे :

  • नशा करके आप किसका नुक्सान कर रहे है ?
  • आप समाज के डर से वे काम क्यों नहीं कर रहे है जिनमे आप की रूचि है और सत्य और अहिंसा के मार्ग के है ?
  • क्या आप को पता है जब आप गहरे नशे में होते है तो यही समाज और अन्य पशु आप की कितनी इज्जत करते है ?
  • क्या आप ने आज तक यह पता किया है की जिस भाव से आप किसी का काम करते है उसी भाव से आप को प्रतिक्रिया मिलती है ?
  • क्या आप ने कभी गौर किया है की आज की आप की इस वर्तमान अवस्था में आप कैसे पहुंचे है ?

अर्थात जब तक आप खुद के प्रति जाग्रत ही नहीं होंगे तो आप को कैसे पता चलेगा की आप की किस क्रिया का क्या परिणाम होगा .
जब आप को कोई बहुत बड़ी ठोकर लगती है तभी आप अपनी आत्मा की आवाज सुनते है .
और आप यह हमेशा याद रखे की यह पूरा संसार आप को तभी प्रेम करेगा जब सबसे पहले आप खुद को प्रेम करना शुरू करेंगे .
अब समस्या यह आती है की आप तो खुद को बहुत प्रेम करना चाहते है पर घर वाले या बाहर वाले आप को खुद के लिए जीने का समय और साधन ही नहीं देते है .
या आप को घर वाले या बाहर वाले समझने की कोशिश ही नहीं करते है .
पर यह केवल आप के मन के माध्यम से रचा गया एक ब्रह्म मात्र है .

वास्तविक सत्य यह है की आप इस पूरे संसार में व्याप्त हो .
अर्थात आप सर्वव्यापी हो .

घर वालो और बाहर वालो के रूप में भी आप ही प्रकट हो रहे हो . पर आप अभी मन की इस कार्य प्रणाली को ठीक से नहीं समझने के कारण खुद को और दुसरो को अलग मानते हो .
आप को मन के माध्यम से इस दूरी की अनुभूति कराना ही आप की चिंता का कारण है . अर्थात आप खुद को भीतर से दुसरो से अलग मानते हो .
तभी तो आप ने देखा होगा की कई बड़े लोग बाते तो बहुत ही ज्ञान की करते है पर वे संसार में सुखी नहीं है .
क्यों ?
क्यों की प्रवचन देना एक मन की आदत हो जाती है और वह यह भूल जाता है की जो बाते मै बोल रहा हूँ उन पर खुद चल रहा हूँ या नहीं .
पर परमात्मा उसका यह कर्म अंकित कर लेते है और वह प्रभु को पाने से वंचित रह जाता है .
पर यह बात यहां सभी के लिए नहीं कही गयी है .
आप ने खुद ने भी नशे की लत से मुक्ति के लिए आज तक बहुत से उपाय किये होंगे पर अभी भी सफलता नहीं मिली है क्यों ?
क्यों अभी आप को यही विश्वास नहीं है की आप ईश्वर की संतान है और इस संसार में आप एक महान विभूति है फिर चाहे आप कुछ भी नहीं कर रहे हो .
क्यों की परमात्मा की रची गयी हर एक कृति महान होती है . आप भी उतने ही महान है जितना नशा नहीं करने वाला इंसान .
पर आप ने खुद ने ही विश्वास की कमी के कारण अपनी आत्मा की खुशबु को खुद से दूर कर रखा है .
अब यदि आप नशे करने वाले बच्चे के माता पिता है तो बच्चे को समझाने से पहले आप खुद निचे दिया गया स्वरुप दर्शन का अभ्यास शुरू करे :

  • हर समय अपने मन में यह बोले की आप ईश्वर की संतान है
  • ज्यादा से ज्यादा अपनी श्वास की अनुभूति करे की अभी आप की श्वास कैसी चल रही है
  • हर समय पूरे शरीर में एकाग्र रहे
  • आप क्या शब्द बोलने वाले है उससे पहले यह सोचे की इसकी प्रतिक्रिया क्या होगी
  • कम बोलने का अभ्यास करे
  • बोलने के लिए आप उन शब्दों का ही चुनाव करे जिन्हे बोलने के बाद आप को और सामने वाले को एक सच्ची ख़ुशी की अनुभूति हो 

जब आप अपने आप को समझने लगेंगे तो फिर आप को यह पता चलेगा की अब आप को अपने बच्चे से कैसे बात करनी है ताकि वह अब आप की बात को ध्यान से सुनने में रूचि दिखाए .
आप अपने आप को इतना बदल ले की आप का बच्चा आप को ही मित्र बनाने के लिए राजी हो जाए .
तभी तो वह आप को इस नशे की लत के कारणों के बारे में बतायेगा .
आप का बच्चा आप से उसके मन की बात तभी करेगा जब आप के भीतर उसे आत्मा की खुशबु का अहसास होने लगेगा .
क्यों की खुद परमात्मा आप के बच्चे के रूप में आकर आप का प्रेम पाना चाहते है .
और आप अपने बच्चे को तभी प्रेम का अहसास करा सकते है जब आप की आत्मा के ऊपर चढ़ी हुयी मन की कालिख आप इस स्वरुप दर्शन के अभ्यास से साफ़ कर लेते है .
क्यों की फिर आत्मा से आत्मा के संपर्क में जो आप का यह मन बाधा बनकर खड़ा था वह अब किसी प्रकार की रुकावट नहीं डालता है .
और आप खुद भी समझते है की पानी की दो बुँदे तभी मिलकर एक होती है जब दोनों बुँदे नंगी होती है और एक दूसरे के पास होती है .
यदि दोनों बूंदो मेसे एक भी बून्द किसी आवरण से ढकी हुयी है तो फिर पास आने पर भी मिल नहीं सकती .
अर्थात आप नशे करने वाले व्यक्ति को तभी समझा सकते है जब आप के भीतर से इस व्यक्ति के लिए प्रेम की तरंगे निकलती हो .
ऐसा प्रभु में भक्ति बढ़ाकर ही संभव होता है . आप के भीतर से निकलने वाला प्रभु का तेज प्रकाश इस व्यक्ति के नशे के कारणों रुपी आवरण को प्रेम की ऊर्जा में बदल देता है .
मतलब पानी की बूँद यदि किसी आवरण से ढकी हुयी है तो भी दूसरी बूँद से निकलने वाले प्रभु की प्रेम की किरणे इस आवरण को भेद कर इस बूँद से मिलन करने में कामयाब हो जाती है .
सलिए स्वरुप दर्शन का अभ्यास खुद से सच्चा प्रेम करना सिखाता है . और जब व्यक्ति खुद से सच्चा प्रेम करता है तो वह दुसरो से भी सच्चा ही प्रेम करता है .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .

 

Latest Posts

Food and Our Relationship

Food and Our Relationship

English हिंदी Food and Our Relationship First, let me explain the meaning of the word "Food". This word has three ...
Should I get a job or start a business?

Should I get a job or start a business?

Job or Business – How to Decide with Swaroop Darshan Should You Choose a Job or Start a Business? English ...
Surrender now, and witness the miracle right now

Surrender now, and witness the miracle right now

Begin Your Inner Journey Remove Karmic Accounts What is Swaroop Darshan? Daily Practice English हिंदी Surrender Now, and Witness the ...
You are not alone

You are not alone

English हिंदी You Are Not Alone My friend, you are not alone in this world. Yet you may ask why ...
Let’s Go Back to Childhood

Let’s Go Back to Childhood

English हिंदी Let’s Go Back to Childhood My brother, remember those days when you went to school wearing shorts, and ...
How Fate Twists Our Understanding So That We Can Truly Experience Our Karma

How Fate Twists Our Understanding So That We Can Truly Experience Our Karma

How Fate Twists Our Understanding So That We Can Truly Experience Our Karma English हिन्दी How Fate Twists Our Understanding ...
How do our actions follow us?

How do our actions follow us?

How Do Our Actions Follow Us? Every action we perform leaves an imprint on our mind. This imprint is treated ...
Do We Have To Suffer For Bad Karma?

Do We Have To Suffer For Bad Karma?

English हिंदी Do We Have to Suffer for Bad Karma? My dear friends, through me the Lord is conveying this ...
Should You Eat Onion and Garlic?

Should You Eat Onion and Garlic?

Should You Eat Onion and Garlic? A Real Awareness-Based Answer by Swaroop Darshan Pause for a few seconds.
Do not ...

 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x