Swaroop Darshan

जीवन का सच

आज मेरे प्यारे मित्रों हमारे परमपिता हम सभी बच्चो को जीवन का सच क्या है इसे समझा रहे है . इसलिए मै आप सभी मित्रों से यह आशा करता हूँ की आप इस लेख को बहुत ही ख़ुशी और साहस के साथ पढ़ने की कोशिश करेंगे .
इस संसार में आप की बात को वे लोग ही सच में सुनेंगे जिनको आप की जरुरत है .
अर्थात जैसे मेरे पास चालीस रूपए है और आप के पास एक किलो चीनी है . अब मुझे मेरे घर के लिए चीनी खरीदनी है . तो मै आप को चालीस रूपए दूंगा और आप मुझे एक किलो चीनी दे देंगे .
और मै चीनी लेकर मेरे घर आ जाऊंगा और आप भी इस चालीस रूपए में से कुछ रूपए और चीनी खरीदने में निवेश करेंगे .
इस प्रकार से मै और आप इस संसार में एक नित्य नवीन आनंद का सृजन करने के लिए चीनी के माध्यम से जुड़ते है .

अब आप ही बताइये की मेरे और आप के बीच झगड़ा कैसे संभव है ?.
झगड़ा तभी होता है जब दो में से किसी एक के भी मन में विकार जाग्रत हो जाते है .
और ये विकार तभी जाग्रत होते है जब हम खुद को परमात्मा से अलग मानने की गलती कर बैठते है .
पर इसका मतलब यह नहीं होता है की संसार में सभी लोग एक दूसरे के स्वार्थ से जुड़े हुए है .
इसे आप ऐसे समझे की जब आप को प्यास लगती है और आप पेट भर के पानी पी जाते है . और फिर पानी पिने की इच्छा उस समय के लिए समाप्त हो जाती है .
तो इसका अर्थ यह होता है की आप ने खुद ने ही अपनी प्यास को मार दिया है . आप को पानी उतना ही पीना चाहिए था जिससे पानी पिने के बाद भी आप को हल्की हल्की प्यास लगती रहती .

क्यों की जीवन का वास्तविक अर्थ है निरंतर परमात्मा के साथ बहना .
जैसे एक नदी का पानी लगातार बहता रहता है तभी वह पानी शुद्ध रह पाता है .
यदि नदी का पानी कई महीनों के लिए बहना रुक जाए और एकदम स्थिर हो जाए तो यह पानी धीरे धीरे सड़ने लगता है .
ठीक इसी प्रकार जब आप अपने शरीर से शारीरिक श्रम करते है तो शरीर के माध्यम से आप ऊर्जा की खपत करते है . और अब शरीर अपनी ऊर्जा की पूर्ति करने के लिए प्यास का अहसास प्रकट करता है .

अर्थात परमात्मा ने आप के शरीर के माध्यम से प्यास को जन्म दिया है .
अब यदि आप अपने जीवन को आनंद के साथ जीना चाहते है तो फिर आप को इस प्यास को जिन्दा रखना पड़ेगा .
अर्थात आप इस प्यास को तभी जीवित रख सकते है जब आप इतना ही पानी पिए की पानी पीते पीते धीरे धीरे आप की प्यास तृप्त होने लगे . अर्थात पानी पिने के बाद आप को एक ख़ुशी की अनुभूति होनी चाहिए .

अब यदि आप पानी इतना पी जाते है की आप के मन को शरीर के माध्यम से प्यास का अहसास पूर्ण रूप से ख़त्म हो जाता है तो अब यदि कोई आप का मित्र पानी के लिए आप से पूछेगा तो अब आप को पानी पिने की इच्छा को लेकर किसी प्रकार का उत्साह नहीं रहेगा .
ठीक इसी प्रकार से हम सभी जीवन को लेकर पानी की तरह ही अन्य वस्तुओं से बोरियत महसूस करते है .
क्यों की हम सब कुछ आज ही प्राप्त करना चाहते है . जबकि जीवन की सच्चाई अनिश्चिंतता में छिपी हुयी है .

क्या होगा यदि आप को आप का पूरा भविष्य अभी पता चल जाए ?

  • आप के जीवन से उत्साह ख़त्म हो जायेगा
  • आप के सभी सपने अब आप को बोर करने लगेंगे
  • आप हर पल खुश नहीं रह पाएंगे
  • आप आश्चर्यचकित होना बंद हो जाएंगे
  • जो हम बचपन में लुख मिचनी खेलते थे वैसा आनंद अब नहीं रहेगा

इसलिए हमारे परमपिता हम सभी बच्चों को यह समझा रहे है की बेटा तू कर्म कर , फिर देख मै तेरे लिए कैसा फल लेकर आता हूँ .
जैसे आप को पता है की हम हमारे बच्चों को पढ़ाई करने के लिए कहते है और उन्हें यह प्रलोभन देते है की यदि आप पढ़ाई में अच्छे नंबर लेकर आएंगे तो हम आप को सरप्राइज गिफ्ट देंगे .
फिर बच्चे हम से पूछते है की पापा हमे तो आप गिफ्ट का नाम बताओं.
तो हम यह कहकर मना कर देते है की बेटा सरप्राइज को सरप्राइज ही रहने दो , जब आप खुद अच्छे परिणाम लाकर उस गिफ्ट को खोलकर देखोगें तो उस समय जो आप को ख़ुशी मिलेगी वह बहुत ज्यादा होगी .

और यदि हम अभी ही आप को सरप्राइज गिफ्ट के बारे में बता देंगे तो आप को उस गिफ्ट को भविष्य में देखने की जो उत्सुकता रहती वह परिणाम से पहले ही धीरे धीरे समाप्त हो जाएगी .

इसलिए हमारे परमपिता हम सभी प्यारे बच्चों को यह समझा रहे है की आप जीवन को लेकर कभी भी निराश ना हो .
क्यों की जीवन में जो हम स्वार्थ को समझते है वह अभी अधूरा ज्ञान है . यदि जीवन में स्वार्थ नहीं रहेगा तो आप का जीवन भी नहीं रहेगा . फिर आप इस संसार का आनंद नहीं ले पाएंगे .
जब आप स्वार्थ का वास्तविक अर्थ समझने में कामयाब हो जायेंगे तो फिर यही लोग आप को बहुत ही अच्छे लगने लगेंगे .

अब परमात्मा समझा रहे है की स्वार्थ का वास्तविक अर्थ होता है:

  • स्वयं का अर्थ . अर्थात आप के खुद का अर्थ
  • आप खुद कौन है
  • आप के मन को यह अहसास क्यों होते है

स्वार्थ को हम बच्चे माया के प्रभाव के कारण इतने समय से गलत परिभाषित करते आ रहे है .
और ऐसा करना परमात्मा की मर्जी से हो रहा था . अब परमात्मा कह रहे है की मेरे प्यारे बच्चों उठो जागो अब यह आप के जीवन को आनंद के साथ जीने का समय आ गया है .
अर्थात जीवन में स्वार्थी बनकर पहले खुद को जानों और फिर जब आप को यह मह्सूस होने लग जाए की अरे मै तो परमात्मा की संतान हूँ. और यह पूरा संसार भी मेरे प्रभु का ही स्वरुप है .

फिर आप को स्वार्थी बनने से जो ऊर्जा प्राप्त होगी उस ऊर्जा को आप अन्य जीवों की सेवा में खर्च करे .
अर्थात पहले खुद का कल्याण फिर सामने वाले का कल्याण करो .
इसलिए परिवार में आप पहले खुद की सेवा करो और फिर इस सेवा से आप को जो शक्ति मिलेगी उससे आप अपने परिवार की सेवा करे .

और इस प्रकार आप का पूरा परिवार एक सेवाभावी परिवार में बदलने लगेगा . और तभी आप पड़ोसी की सेवा कर पाएंगे .
अभी हम सभी अपने मान सम्मान को बढ़ाने के लिए सेवा कार्य करते है . इसलिए जब हमे मान सम्मान नहीं मिलता है तो फिर हमारे भीतर क्रोध का जन्म होने लगता है . इसलिए हमारे परमपिता हम सभी बच्चों को यह समझा रहे है की आप इन सेवा कार्यो को भी मुझे ही समर्पित करदो. ताकि मै आप सभी बच्चों को मान सम्मान के इस बोझ से मुक्त करके परमानंद की अनुभूति करा दू .

इसलिए आज हमारे परम पिता ने हम सभी बच्चों को यह समझाया की जीवन ख़ुशी का ही एक दूसरा रूप है .
जीवन बहने का नाम है .
जीवन रचनात्मकता का नाम है .
जीवन प्राण है .

धन्यवाद जी . मंगल हो जी .

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