दोस्त हमने पिछले लेख में समझा की विचार क्या है, विचार का स्त्रोत क्या है , विचार कौन प्रकट करता है . हालांकि मेरे लिए पिछले लेख में विचार का सम्पूर्ण ज्ञान समझाना संभव नहीं था . इसलिए इस लेख में मै ‘विचारों का प्रभाव‘ समझाने जा रहा हूँ . मुझे पूरा विश्वास है की आप इस लेख को पूरे समर्पण भाव से समझने का प्रयास करेंगे .

आप के ऊपर विचारों का प्रभाव
- आप का पूरा शरीर विचारों का समूह है
- आप का मन भी विचारों का समूह है
- आप के शरीर के चारों तरफ भी विचारों का आभामंडल है
- यदि अभी आप के पास कोई व्यक्ति बैठा है तो वह भी विचारों का समूह है
- अब यदि आप इस व्यक्ति को देखते है तो आप के मन में इस व्यक्ति से सम्बंधित विचार आने लगते है
- और इसी समय आप के पास कोई अन्य व्यक्ति और आ जाता है तो आप के मन में उससे सम्बंधित विचार आने लगते है
- ठीक इसी प्रकार यदि इसी समय आप को कोई बाहर से आवाज देता है तो फिर उस आवाज से सम्बंधित विचार मन में आने लगते है
- हालांकि आप के ऊपर विचारों का प्रभाव जैसा अभी पड़ रहा है वैसा सभी के लिए सच नहीं है
- यदि आप एक पूर्ण जाग्रत व्यक्ति है तो फिर आप के लिए हर विचार प्रभु का अहसास है
उदाहरण के लिए:
विचारों का प्रभाव – राई का पहाड़ बनाना
- जैसे आप दो दोस्तों में कोई छोटी सी बात को लेकर अनबन हो गयी
- और फिर आप दोनों ने एक दूसरे को माफ़ करके मामला शांत कर लिया
- अब इस पूरी घटना के बारे में आप ने भूलवश या विश्वास करके किसी तीसरे व्यक्ति को बता दिया
- और यह तीसरा व्यक्ति विचार नहीं मिलने के कारण आप के दोस्त से जलता है
अब
विचारों का प्रभाव करेगा आप के साथ चमत्कार

- जैसे ही आप इस तीसरे व्यक्ति को उपरोक्त घटना के बारे में बतायेंगे यह बहुत खुश होगा
- क्यों की इस व्यक्ति के विचारों की प्रकृति आग में घी डालने जैसी है
- ऐसे व्यक्ति हमेशा इसी प्रकार के मौको की तलाश में रहते है
- और आप ने खुद की जाग्रति के अभाव के कारण घर बैठे बैठे यह मौका इस व्यक्ति को दे दिया
- अब यह व्यक्ति आप से कहेगा की मुझे तो पहले ही पता था की आप का दोस्त सही व्यक्ति नहीं है
- आप को कहेगा की तुम बहुत सीधे पड़ते हो
- आप को दोस्त की उस घटना को हल्के में नहीं लेना चाहिए
- मेने आप के उस दोस्त के बारे में कई लोगों से पता किया है
- वह आप की सम्पति हड़पना चाहता है
- वह आप से मतलब निकालने के लिए ही आप से दोस्ती निभा रहा है
- तुम मेरे सच्चे दोस्त हो इसलिए मै तो तुम्हारे भले के लिए ही समझा रहा हूँ
- बाकी तुम्हारी मर्जी बाद में मुझे मत बोलना
- आज के जमाने में कोई छोटी सी गलती को भी आसानी से कैसे माफ़ कर सकता है
- तुम बहुत सीधे इंसान हो इसलिए मुझे तुम्हारी बहुत चिंता रहती है
- तुम अभी इस घटना के पीछे उस दोस्त की साजिश को नहीं जानते हो
- इस प्रकार से यह तीसरा व्यक्ति आप के मन में विचारों का तूफ़ान खड़ा कर देगा
अब विचारों के प्रभाव के कारण आप की प्रतिक्रिया देखों
जब आप इस तीसरे व्यक्ति की बाते सुनेंगे तो यदि आप जाग्रत नहीं है तो आप निम्न प्रकार से कमाल का डांस करेंगे :
- हां यार मेने तो यह दिमाग ही नहीं लगाया
- अच्छा इसीलिए वह मेरे पास बार बार आता था
- और मुझे हमेशा यह कहता था की मै तेरे लिए जान भी दे सकता हूँ
- यार मेने तो दिमाग ही नहीं लगाया की कोई इंसान मेरे लिए जान कैसे दे सकता है
- पर मेरे एक चीज समझ में नहीं आ रही है की मुझे इतने साल हो गए उससे दोस्ती निभाते हुए
- मेने मेरे दोस्त को ही सही से नहीं पहचाना और तुमने उसके बारे मुझे समझाया है
- यार दोस्त होतो भाई तेरा जैसा
- भगवान तेरा भला करे भाई जो तूने मुझे ऐसे कपटी दोस्त से बचा लिया
- मै तेरा यह अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा
- इस प्रकार से आप एक पागल की तरह इस तीसरे व्यक्ति के सम्मान में तारीफों के कसीदे गढ़ेंगे
अब इस तीसरे व्यक्ति के भीतर विचारों का प्रभाव देखे
- आप का इस तरह से इस तीसरे व्यक्ति की बातों को सही मान लेना इसके मन में गुदगुदी करता है
- अब यह सोच रहा है की मेरी दाल यही गलेगी
- अब आप के उस दोस्त के प्रति उपरोक्त विचार इस तीसरे व्यक्ति को ख़ुशी दे रहे है
- अब यह तीसरा व्यक्ति आप दोनों दोस्तों को अलग करने के षड़यंत्र के विचारों की रचना कर रहा है
- अर्थात यह व्यक्ति आप को विचारों के प्रभाव का इस्तेमाल करके सम्मोहित कर रहा है
अब दोस्त अंत में आप के साथ क्या होगा ?
- अब आप अपने उस दोस्त को शक की नज़र से देखने लगेंगे
- जब भी आप उस दोस्त से मिलेंगे तो आप इस तीसरे व्यक्ति के विचारों के अनुसार उसे देखेंगे
- अब उसकी हर बात पर आप को शक होने लगेगा
- इन्ही विचारों के शकरूपी प्रभाव के कारण आप उस दोस्त से बात बात पर झगड़ा करने लगेंगे
- अब क्यों की इससे पहले आप उससे एक सच्चे दोस्त की तरह मिलते थे इसलिए वह सामान्य था
- पर अब आप का ऐसा व्यवहार देखकर वह दोस्त भी हैरान होने लगेगा
- आप खुद ही इस तीसरे व्यक्ति के प्रभाव में आकर अपने दोस्त को ही नहीं पहचान पा रहे है
- मेरे दोस्त यही विचारों की माया का प्रभाव होता है
- और इस प्रकार से आप ने खुद ने ही एक छोटी सी घटना को पहाड़ में बदल दिया है
- और मेरे दोस्त यही कहानी हम सभी व्यक्तियो की है . बस कहानी का रूप अलग अलग है
समाधान – इसकी जगह आप यह करो राई का पहाड़ नहीं बनेगा
- जब आप दोनों दोस्तों ने मामला शांत कर लिया है तो तीसरे को सरपंच मत बनाओ
- तीसरे व्यक्ति से हमेशा कहो की यदि आप प्यासे होतो पानी लाऊ और भूखें होतो खाना खा लो
- यदि आप दोनों दोस्त सहमत हो तभी किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लो
- ज्ञानी की पहचान यह है जो व्यक्ति भरे बाजार में से नंगा होकर एक बच्चे की तरह निकल जाए और अपनी पत्नी को माँ कह सके
- जो भी विचार आप दोनों दोस्तों को अलग करता है उससे हाथ जोड़ लो
- छोटी सी घटना या बड़ी घटना के बाद मौन नहीं रह सको तो एकांत में जाकर प्रभु के सामने अपने मन की भड़ास निकाल लो
- आप को सच्चा दोस्त तभी मिलेगा जब आप खुद के सच्चे दोस्त बन जायेंगे
मेरे दोस्त विचारों का प्रभाव आप निम्न उदाहरण से भी समझ सकते है . यहां मेने उन घटनाओं के बारे में बताया है जो आप को इस संसार में बहुत ही आसानी से देखने को मिल जायेगी .
हालांकि निम्न उदाहरण से आप बहुत अच्छे से समझ सकते है
- रास्ते में आप को किसी ने मोटा कहा अब आज आप खुद को कांच में अवश्य देखेंगे
- रिश्तेदारी में आप को किसी ने पतला कहा अब आप घर आकर शीशे में अवश्य देखेंगे
- किसी मोटे व्यक्ति ने आप को पतला कहकर टेंसन देदी पर वह खुद आप से प्रभावित होकर शीशे में देखेगा और आप जैसा पतला होना चाहेगा
- पतले होने की दवा बेचने वाले को पूरा संसार मोटा दिखाई देता है
- मोटे होने की दवा बेचने वाले को पूरा संसार पतला दिखाई देता है
- चोर को हमेशा दूसरों के पास धन नज़र आता है
- चिंता में रहने वाले व्यक्ति को हमेशा दूसरे लोग भी चिंता करते है ऐसा विचार बार बार मन में आता है
- बस में कन्डक्टरी करने वाला रात को भी जयपुर जयपुर जोधपुर जोधपुर दिल्ली दिल्ली करता है
- लड़ाई झगडे वाली फिल्मे देखने वाला व्यक्ति रात को भी लड़ाई झगड़ा करता है
- जो पूरे दिन भर परमात्मा के अहसास में रहकर कार्य करता है वह रात को भी प्रभु को ही भजता है
- जो किसी के पैसे समय पर नहीं देता है वह अपने दोस्तों को अभी यही सिखाता है की कर्जा करो और घी पियो
इस प्रकार मेरे दोस्त आप और मेरे दोनों के रूप में खुद परमात्मा ही खेल खेल रहे है और हम विचारों के प्रभाव को नहीं समझने के कारण एक दूसरे के कपड़े फाड़ रहे है .
तो फिर आप इन विचारों के प्रभाव से कैसे बचे ?
- इसके लिए दोस्त आप को क्रियायोग ध्यान सीखना बहुत जरुरी होता है
- क्यों की क्रियायोग ध्यान से विचारों का प्रभाव समझ में आने लगता है
- विचारों के प्रभाव को समझने के कारण आप धीरे धीरे विचारों के स्त्रोत को समझने लगते है
- विचारों के स्त्रोत को समझने के कारण आप इस स्त्रोत से अपने सम्बन्ध को समझने लगते है
- विचारों के स्त्रोत से आप के सम्बन्ध को समझने के कारण आप इस सम्बन्ध को पहचानने लगते है
- जब आप इस सम्बन्ध की पहचान कर लेते है तो आप इस सम्बन्ध में परिवर्तन कर सकते है
- अर्थात ऐसा अभ्यास करके आप परमात्मा की उस शक्ति से जुड़ने लगते है जहा से विचार प्रकट होते है
- अब आप को अनुभूति होने लगती है की आप और परमात्मा दो अलग अलग नहीं है
- मै खुद ही क्रियायोग ध्यान के अभ्यास की कमी के कारण विचारों को ही सच मानने लग गया था
- मुझे तो अब पता चला है की जो कुछ भी मै देख रहा हूँ वह तो मेरे प्रभु से प्रकट हो रहा है
इसीलिए मै , दोस्त आप को धीरे धीरे क्रियायोग ध्यान के अभ्यास की तरफ लेकर चल रहा हूँ . ताकि आप इस अभ्यास से जुड़कर अपने स्वरुप का दर्शन कर सके . और विचारों के प्रभाव से आप हमेशा के लिए अप्रभावित रहे .


